छत्तीसगढ़ का एकमात्र देवी कामाख्या मंदिर, तंत्र सिद्ध पद्धति से किया जाता है पूजन.

(दिलीप जगवानी) : बिलासपुर – विख्यात कामाख्या मंदिर छग से कोसों असम मे है। मगर देवी की अनुकृति बिलासपुर के राजकिशोर मंदिर मे विराजमान है। पांच दशक पुराना मंदिर शरण मे आए श्रद्धालुओं की विपत्ति दूर करता है। इस पर भरोसा करने वाले भक्त चैत्र नवरात्र पर देवी का दर्शन करना नहीं भूलते।
छत्तीसगढ़ मे एकमात्र देवी कामाख्या का मंदिर राजकिशोर नगर मे है जहां भक्त मनोकामना लेकर कई राज्यों से पहुंचे है। चैत्र नवरात्र पर उनके दर्शन पूजन करने परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालु माता पर अटूट विश्वास रखते है। बिलासपुर मे तंत्र सिद्ध कामाख्या देवी की छवि देखना अपने आप मे दुर्लभ अवसर है।
असम के गुवाहाटी मे कामाख्या मंदिर पहुंचना सभी के लिए संभव नहीं है हालांकि वहां विश्व के कई देशों से तंत्र विधा से पूजन मे विश्वास रखने वाले पहुंचते है। उनकी अनुकृति का दर्शन और तांत्रिक पद्धति से पूजन हवन शहर के इस मंदिर मे किया जाता है। इस मंदिर के संस्थापक और पुजारी मनहरण लाल यादव ने संकल्प लेकर लोगो की मनोकामनाएं सिद्ध करने पूरे मनोयोग से कार्य कर रहे है।
सिद्ध मंदिर मे चैत्र नवरात्र पर मनोकामना के सैकड़ो दीप आस्था की आभा बिखेर रहे है. इसके ताप मे बैठकर सेवादार राम शंकर शुक्ला दुर्गा सप्तशती का पाठ और बीज मंत्रों का प्रतिदिन जाप करते है। यह लोक कल्याण का उनका प्रयास होता है।
मातृ शक्ति माता कामाख्या के प्रति विशेष भाव रखती है। नवरात्र और इसके बाद विशेष तिथि पर मनवांछित फल प्राप्ति और परिवार के कल्याण के लिए अनुष्ठान करने लोग पहुंचते है।




