छत्तीसगढ़

माशिमं का तुगलकी फरमान…. सरकारी स्कुल कहा से लाये 25 हजार..

(दिलीप जगवानी) : माध्यमिक शिक्षा मंडल के तुगलकी फरमान ने सरकारी स्कूलों मे हड़कंप मचा दिया है. जिसमे लेट एंट्री फीस के नाम पर 25 हजार रूपये तक जमा करने का कहा है.

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इस आदेश को उगाही बताते हुए शासकीय स्कुल संगठनों ने इसका विरोध किया है. मसले पर जिला शिक्षा अधिकारी का बयान अविवेकपूर्ण जान पड़ता है.

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दरअसल हुआ यूं है कि कई स्कूलों में बच्चों की माध्यमिक शिक्षा मंडल के पोर्टल मे एंट्री नहीं हो पायी है. स्कूलों की तरफ से इसके लिए पोर्टल फिर से खोलने की मांग की गई थी.

माशिम ने इसे लेकर पहले डीईओ को निर्देश जारी कर स्कूलों मे पढ़ने वाले 9 वीं से 12 कक्षा के विधार्थियो की जानकारी मंगायी. पता चला है की जिले के सरकारी, अनुदान प्राप्त औऱ कूछ निजी स्कूलों मे पढ़ने वाले 1247 बच्चों की एंट्री माध्यमिक शिक्षा मंडल के वेब पोर्टल पर नही हुई है.

इधर एंट्री के लिए पोर्टल खोलने की सूचना देते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कहा है विधार्थियों की एंट्री करनी है तो पोर्टल बंद होने 31 अगस्त से 25 सितंबर तक यानि बच्चों के छूटने की जानकारी देने तक हर दिन का एक हजार लेट फीस जोड़कर देना होगा.

माध्यमिक शिक्षा मंडल का यह फरमान सरकारी औऱ अनुदान प्राप्त स्कूलों को परेशानी मे डाल दिया है. जहां बच्चों को मुफ्त मे शिक्षा दी जाती है उस विद्यालय के यदि एक छात्र की भी एंट्री करनी है तो उसे 25 हजार माध्यमिक शिक्षा मंडल को देना होगा. इसके बाद ही वह एंट्री कर सकते हैं.


सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक दुबे का कहना है कि जिन स्कूलों मे एंट्री होनी है वह शासकीय स्कूल या अनुदान प्राप्त है वहां के संस्था प्रमुख आखिर इतनी राशि कहां से देंगे. माशिमं का यह आदेश
हास्यास्पद है. इसे उगाही करार देते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है.


विभिन्न शिक्षक संघो ने आदेश की आलोचना की है औऱ कहा है जिस प्रदेश में व्यापमं का एग्जाम नि:शुल्क होता है वहां माध्यमिक शिक्षा मंडल इतनी तगड़ी लेट फीस वसूलने की सोच रहा है. इस लिखित आदेश के बाद सोच मे पड़े संस्था प्रमुखो की चिंता छोड़ जिला शिक्षा अधिकारी का इस मामले मे जवाब अविवेक पूर्ण जान पड़ता है.

लेट फीस का जिम्मा उठाने कहकर डीइओ टीआर साहू ने लोकस्वर टीवी से कहा स्कूलों को लेट राशि की व्यवस्था अपने स्तर पर करना होगा. इसका समायोजन कहा औऱ कैसे करना है वे निर्णय ले.


प्रदेश के शिक्षा जगत मे इस आदेश से हैरानी और खलबली मची है. ऊपर से एंट्री के लिए केवल चार दिन का समय देने से स्कूल प्रमुखो का बीपी बढ़ गया है. उस पर डीइओ गैर जिम्मेदार बयान संस्था प्रमुखो को असहाय बना क़र रहा है.

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