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राजनांदगांव

कोरोनाकाल के सरकारी मदद का राशन गबन करने वाले पर कार्यवाही आखिर कब….! खाद्य मंत्री के प्रभार जिले में ही आदिवासी क्षेत्र के खाद्य गबनकर्ता दो वर्षो से घूम रहे बैखौफ

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(उदय मिश्रा) : राजनांदगांव – छुरिया विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नादियाखुर्द में आज से ठीक दो साल पहले कोरोना काल में गरीबों को दिए जाने वाले राशन को सोसाइटी संचालक बाप, बेटे और सेल्समैन ने ही गबन कर डाला बाप-बेटों ने मिलकर करीब आठ लाख रुपये के राशन का वारा न्यारा कर दिया सरकारी राशन को हजम करने के मामले पर क्षेत्र के अनुविभागीय दंडाधिकारी और जिला खाद्य अधिकारी ने अब तक इस मामले पर राहत बरता हुआ है आखिर इतने बड़े हुए सरकारी घोटाले को लेकर विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी आखिर क्यों यह भी जांच का विषय है। बाप बेटे और दोनों ने मिलकर एक सौ बीस क्विंटल चांवल एवं साठ क्विंटल गेंहूँ का प्रमाणित घोटाला किया गया।

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इन दोनों बाप-बेटों ने माह जुलाई 2020 का राशन वितरण ही नहीं किया और राशन दुकान में ताला ठोककर दुकान का लैपटॉप एवं राशन वितरण के पूरे पांच साल का रिकार्ड लेकर भाग गए थे चूंकि उक्त माह का पंचायत के हितग्राहीयो को जब 15 दिन बाद भी राशन नहीं मिला, तब ग्रामीणों ने मामले की शिकायत स्थानीय सरपंच दीपक ठाकुर से की थी। ग्रामीणों की शिकायत पर ही सरपंच दीपक ठाकुर ने पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला कलेक्टर व छुरिया क्षेत्र की जनप्रतिनिधि विधायक छन्नी साहू को भी की थी। सरपंच की शिकायत पर तात्कालीन जिला कलेक्टर ने एसडीएम डोंगरगांव को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। एसडीएम ने फूड इंपेक्टर को जांच के लिए भेजा फूड इंस्पेक्टर ने ग्राम पंचायत पंहुचकर राशन दुकान का ताला सैकड़ों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष तोड़ा जहां पर तत्कालीन सरपंच दीपक ठाकुर, पंचायत के समस्त पंच, कोटवार, पटेल सहित अनेक लोग मौजूद थे। फूड इंस्पेक्टर द्वारा पूरे मामले का, चार पन्नो में पंचनामा तैयार किया गया जिसमें सभी के हस्ताक्षर मौजूद है। जहां पर 120 क्विंटल चांवल एवं 60 क्विंटल गेंहूँ इन बाप बेटों द्वारा गबन करना पाया गया।

एसडीएम डोंगरगांव ने अब तक नहीं दिए एफआईआर के निर्देश

फूड इंस्पेक्टर द्वारा रिपोर्ट सौपे जाने के बाद नियमत : एसडीएम को उक्त मामले में खाद्य निरीक्षक को एफ आई आर कराने निर्देशित करना था
पर राशन निगल गए बाप-बेटे देवसागर गुप्ता , व हितेश गुप्ता पर नरमी बरती जा रही है। आरोपियों के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी करने थे लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है, जबकि सभी चीजों के लिखित दस्तावेज, साक्ष्य,गवाह एवँ प्रमाण सब कुछ पानी की तरह साफ नजर आ रहा है और उपलब्ध भी है। खाद्यान्न को गबन करना, मतलब चोरी करना ही है, ऐसे में उक्त मामले में पिता-पुत्रों देवसागर व हितेश गुप्ता पर चोरी का ही मामला दर्ज होगा, जिसके तहत आरोपियों को सात साल की सजा हो सकती है। उस समय पटेल, सभी पंच एवं अनेकों ग्रामीण उपस्थित थे, सभी की उपस्थिति में पंचनामा तैयार किया गया था। उक्त पंचनामे में सारी बातें लिखी गई है। इसी मामले पर किए गए विधायक को शिकायत सहित सभी दस्तावेजों को संलग्न कर शिकायतकर्ता ने संबंधित पूरे मामले की लिखित शिकायत जिले के कलेक्टर तारण प्रकाश सिन्हा से कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने एवं दोषी बाप बेटों पर कानूनी कार्यवाही कर इन आरोपियों को जेल भेजने की मांग की है। शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि यदि उक्त मामले में जिला प्रशासन द्वारा आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर इन्हें जेल नहीं भेजा गया तो वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनांदगांव के विभिन्न विधानसभाओं के दौरे में आगमन पर ग्रामीण जन इस मामले को प्रदेश के मुखिया को अवगत कराने का निर्णय लिया है।

खाद्य मंत्री के प्रभार जिले में ही खाद्य के गबनकर्ता दो वर्षो से घूम रहे बैखौफ

आदिवासी क्षेत्र के सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान से बांटे जाने के लिए आया हुआ हितग्राहियों का राशन का सनसनीखेज गबन का मामला सामने आया खाद्य निरीक्षक द्वारा ग्राम पंचायत नादियाखुर्द में संचालित राशन दुकान में छापामार कार्यवाही की गई थी जिसमें 124 क्विंटल चावल 49 क्विंटल गेहूं महामारी कोरोना की विषम परिस्थिति में ग्रामीण जनों को बांटने के लिए आया हुआ था जिसे गबन करना पाया गया आदिवासी क्षेत्र में विषम कोरोना काल का राशन खाने वाले जांच में आने के बावजूद में भी दोषी खुले घूम रहे हैं आश्चर्य की बात तो तब है जब प्रदेश के खाद्य मंत्री ही जिले के प्रभारी मंत्री भी है इसके बावजूद भी खाद्य विभाग के अधिकारियों को खाद्य मंत्री का थोड़ा भी भय नहीं है जबकि इस घोटाले का मामला 2 साल पहले ही दर्ज हो जाना था आखिर क्या ऐसा कारण है जिसमें छुरिया क्षेत्र में कांग्रेस की विधायक होने के बावजूद में भी भाजपा से ताल्लुक रखने वाले गबन के आरोपी खुले घूमते नजर आ रहे हैं।

एक समय तत्कालीन सांसद का हितेश गुप्ता कांग्रेस के नेताओं तक की जी हुजूरीम में

भाजपा का पदाधिकारी सेल्समेन गुप्ता इतना शातिर है की वो कांग्रेस के नेताओं को भी झांसा देकर अपना काम निकालने में माहिर है यही कारण हैं की कितने बड़े मामले में भी कांग्रेस की सत्ता होने के बावजूद आरोपी पर एफआईआर नही हो पाई । सरकारी राशन दुकान का सेल्समैन हितेश गुप्ता भाजपा युवा मोर्चा का भी पदाधिकारी है ने अपने पिता के साथ मिल कर विषम कोरोनाकाल की महामारी के दौरान दाने दाने के लिए तरसते लोगों के लिए राशन की व्यवस्था करने वाले सरकार का ही राशन बाप बेटों ने हजम कर लिया आश्चर्य की बात यह है यह हितेश गुप्ता है जो भाजपा का कार्यकर्ता भी है इसकी शातिर आंखे गरीबों का चावल और गेहूं हजम करने की गहराई बया करती है।

क्षेत्र की तेजतर्रार विधायक की गरीबों के राशन को बेचने वालों के खिलाफ चुप्पी

खुज्जी विधानसभा क्षेत्र की महिला विधायक रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर अपनी सुरक्षा तक छोड़ देती हैं और तो और राजनांदगांव से विधानसभा स्कूटी में सफर कर प्रदेश में चर्चित होकर सरकार के नाक में दम कर देती है वही ग्रामीण क्षेत्र खासकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में गंभीर संकट के दौर सरकार के द्वारा पहुंचाए गए राशन को बाप बेटे ने गबन के मामले में उफ्फ तक नही कहती जबकि रेत के मामले में अपनी सरकार को कई बार आइना दिखा चुकी है विधायक का यह कैसा नजरिया है जिसमें बीजेपी कार्यकर्ता गरीबों का राशन खा जाते हैं मामला प्रमाणित भी हो जाता है पर विधायक इस मामले में अक्षम नजर आती है । वहीं कांग्रेस के मतलब अपने पार्टी के ही खिलाफ रेत के मामले पर दंगल करती नजर आती है।

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