बिलासपुर में ट्रैफिक व्यवस्था फेल, महिला रेलकर्मी ने दिखाई जिम्मेदारी

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर से इस वक्त एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है…जहां ट्रैफिक पुलिस की भारी लापरवाही ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तोरवा के प्रमुख चौक पर करीब एक घंटे तक चारों दिशाओं से जाम लगा रहा…लेकिन जानकारी होने के बावजूद न ट्रैफिक पुलिस पहुंची, न ही तोरवा थाना पुलिस। हालात ऐसे थे कि आखिरकार एक महिला रेलकर्मी को खुद सड़क पर उतरकर यातायात संभालना पड़ा।
तस्वीरें तोरवा चौक की हैं…रेलवे रोड, पावर हाउस रोड, छठ घाट रोड और जगमल चौक रोड चारों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें…करीब एक घंटे तक लोग जाम में फंसे रहे। हैरानी की बात यह रही कि ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। इसी दौरान भीड़ और अफरा-तफरी को देखकर रेलवे के सिविल डिफेंस की महिला कर्मचारी ने खुद मोर्चा संभाल लिया। अकेले ही सड़क पर उतरकर लगभग एक घंटे तक वह महिला ट्रैफिक कंट्रोल करती रही। सिविल डिफेंस में पदस्थ महिला रेलकर्मी की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता देखकर आम लोगों ने भी उनका साथ दिया…लोग खुद आगे आकर यातायात व्यवस्था बहाल करने में जुट गए।
यह नज़ारा मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल तो है ही, साथ ही ट्रैफिक पुलिस की बड़ी नाकामी को भी उजागर करता है। एक तरफ शहर में सड़क सुरक्षा माह का ढिंढोरा पीटा जा रहा है…दूसरी तरफ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे नजर आ रही है। चौक-चौराहों पर ट्रैफिक जवान केवल चेकिंग और वसूली करते दिखते हैं,लेकिन जाम की स्थिति में उनकी मौजूदगी नदारद रहती है। शहर के कई इलाकों में लगातार जाम की समस्या बनी हुई है, इसके बावजूद ट्रैफिक सुधार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। सवाल बड़ा है…क्या ट्रैफिक व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी अब आम नागरिकों और महिला कर्मचारियों पर छोड़ दी गई है? और अगर ट्रैफिक पुलिस जाम जैसी स्थिति में भी मौके पर नहीं पहुंचेगी, तो फिर सड़क सुरक्षा और यातायात सुधार के दावे किस काम के?




