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तो आज राष्ट्रीय पार्टी बन जाएंगी आम आदमी पार्टी.. गुजरात और हिमाचल के नतीजे करेंगे तय

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(शशि कोन्हेर) : गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही आम आदमी पार्टी के रूप में देश को एक नया राष्ट्रीय राजनीतिक दल मिल जाएगा. 8 दिसंबर को आठवें राष्ट्रीय दल के ग्रुप में आप की एंट्री का रास्ता साफ हो जाएगा. गुरुवार को आम आदमी पार्टी निर्वाचन आयोग की ओर से राष्ट्रीय पार्टी होने की पात्रता पूरा करने में सक्षम हो जाएगी. अब तक देश में सात राष्ट्रीय दल हैं. कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी, सीपीआई, सीपीएम, राष्ट्रवादी कांग्रेस यानी एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी.

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दिल्ली, पंजाब में सत्ता हासिल करने और गोवा विधानसभा में दो विधायक जीतने के बाद अब गुजरात और हिमाचल में मिले मत प्रतिशत इसे राष्ट्रीय दल का दर्जा दिला सकते हैं. हालांकि एमसीडी में जीत के आंकड़े हौसला बढ़ाने के लिए तो सही हैं लेकिन उनका राष्ट्रीय दल बनाने की प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं है. राष्ट्रीय दल का दर्जा मिलने के बाद आम आदमी पार्टी को दिल्ली में बड़ा दफ्तर और पूरे देश में एक चुनाव चिह्न के साथ-साथ अन्य बहुत सी सुविधाएं भी मिलेंगी.

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बता दें कि अन्ना आंदोलन ने निकल कर अरविंद केजरीवाल साल 2013 में आम आदमी पार्टी के नाम से राजनीतिक दल का गठन किया था. इस दल ने दिल्ली में हुए चुनाव में 28 सीटें जीतकर प्रदेश में मान्यता प्राप्त की थी. दिल्ली के साथ पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की मौजूदा समय में सरकार है. इसके अलावा गोवा विधान सभा में दो विधायक और 6.8 फीसदी किया था. इस आधार पर दिल्ली, पंजाब , गोवा में आम आदमी पार्टी एक पंजीकृत मान्यता प्राप्त पार्टी है, जिसके पास चुनाव चिन्ह के रूप में झाड़ू है.

क्या है राष्ट्रीय पार्टी बनने का पैमाना?

संविधान विशेषज्ञ डॉक्टर सुभाष कश्यप के मुताबिक राष्ट्रीय दल होने की तीन मुख्य शर्तों या पात्रता में से एक शर्त ये है कि कोई भी राजनीतिक दल चार लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा में 6 फीसदी वोट हासिल करे. या फिर विधानसभा चुनावों में चार या इससे अधिक राज्यों में कुल 6 फीसदी या ज्यादा वोट शेयर जुटाए.

गोवा में भी AAP ने 6.77 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें हासिल की. कुछ अन्य राज्यों में भी आम आदमी पार्टी की हिस्सेदारी और वोट शेयर हैं. अब यह चर्चा होने लगी है कि आम आदमी पार्टी राष्ट्रीय पार्टी (National Party) बनने जा रही है. चुनाव के राजनीतिक नियमों के जानकार केजे राव के मुताबिक निर्वाचन आयोग के सफाई अभियान के बाद अब देश में करीब 400 राजनीतिक पार्टियां हैं. लेकिन इनमें से महज 7 को ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है.

देश में होती हैं तीन स्तर की पार्टियां

जानकारी के लिए बता दें कि हमारे देश में तीन स्तर की पॉलिटिकल पार्टियां हैं. राष्ट्रीय पार्टी, राज्य स्तरीय पार्टी और क्षेत्रीय पार्टी. देश में 7 राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा राज्य स्तर के 35 राजनीतिक दल हैं. अभी 250 से ज्यादा क्षेत्रीय दल मौजूद हैं. किसी भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए कुछ शर्तें, नियम और पात्रता होती हैं. लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन, वोट शेयर, कई राज्यों में मान्यता, विधानसभा चुनावों में ज्यादा राज्यों में वोट शेयर से संबंधित नियमों के आधार पर राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर मान्यता दी जाती है. जो भी पार्टी इन शर्तों में से कोई एक कसौटी पर खरी उतर जाती है, उसे राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर मान्यता दे दी जाती है.

ये हैं राष्ट्रीय पार्टी बनने के मानक

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प्राथमिकता रहती है कि कोई राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव के दौरान तीन राज्यों में लोकसभा की 2 फीसदी यानी 11 सीटें जीते या कोई पार्टी चार या इससे ज्यादा राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी के रूप में मान्यता रखती हो. कोई राजनीतिक दल चार लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा में 6 फीसदी वोट हासिल करे या फिर विधानसभा चुनावों में चार या इससे अधिक राज्यों में कुल 6 फीसदी या ज्यादा वोट शेयर जुटा ले.

राष्ट्रीय पार्टी बनने से मिलते हैं ये फायदे

किसी भी राजनीतिक दल के राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर मान्यता मिलने के कई फायदे होते हैं. सबसे पहला फायदा तो स्तर को लेकर ही है. राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल होने के बाद अखिल भारतीय स्तर पर एक आरक्षित चुनाव चिह्न मिल जाता है. निर्वाचन आयोग जिन राजनीतिक दलों को मान्यता देता है उनको कुछ विशेष अधिकार और सुविधाएं भी देता है जैसे, पार्टी को एक स्थाई चुनाव चिन्ह आवंटित किया जाता है. निर्वाचन सूची मुफ्त और अनिवार्य तौर पर प्राप्त करने की सुविधा दी जाती है. चुनाव के कुछ समय पहले उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर टेलीविजन और रेडियो प्रसारण के लिए समय दिए जाने की अनुमति दी जाती है ताकि वे अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकें.

नामजदगी के पर्चे यानी नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए उम्मीदवारों के प्रस्तावकों की संख्या बढ़ जाती है. साथ ही नेशनल मीडिया पर फ्री एयरटाइम मिल जाता है. इससे पार्टी की पहुंच बढ़ने में आसानी होती है.

स्टेट पार्टी का भी अलग है पैमाना

इसके अलावा स्टेट पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए भी नियम और शर्तें हैं. पहली तो ये कि चुनाव आयोग से किसी भी मान्यता प्राप्त दल को प्रादेशिक (क्षेत्रीय दल) या यूं कहे कि स्टेट पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए 8 फीसदी वोटों की जरूरत होती है. संबंधित राज्य में लोकसभा या विधानसभा चुनाव में 8 प्रतिशत वोट पाने की जरूरत होती है. यदि किसी पार्टी को विधानसभा चुनाव में 6 फीसद वोट और दो सीटें मिलती है तो उसे भी प्रादेशिक पार्टी (State Party) का दर्जा मिल जाता है.

स्टेट पार्टी का दर्जा प्राप्त करने का एक और तरीका है कि संबंधित राज्य में विधानसभा में कम से कम तीन सीटें मिल जाएं भले ही वोटों की हिस्सेदारी कुछ भी हो. यानी चुनावी नतीजों से ये साफ है कि आम आदमी पार्टी 8 दिसंबर को राष्ट्रीय दल की पात्रता पूरी कर लेगी. संभव है 2022 में ही वो इसका दावा करे और इसी साल उसे ये मान्यता मिल भी जाए.

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