यह सिर्फ एक बारिश नहीं थी, यह था सिस्टम का “Failure”, जहां जनता अंधेरे में थी और जिम्मेदार “System” चुप्पी साधे बैठा रहा….

बिलासपुर में शनिवार को हुई मूसलधार बारिश ने शहर की व्यवस्था की कमज़ोरियों को उजागर कर दिया। तेज़ हवाओं के साथ हुई बारिश ने जहां सड़कों पर पेड़ गिरा दिए, वहीं सबसे गंभीर संकट बिजली व्यवस्था पर टूटा। पूरा शहर कई घंटों तक अंधेरे में डूबा रहा, लेकिन जिम्मेदार विभाग—बिजली विभाग—मूकदर्शक बना रहा।
दोपहर से लेकर देर रात तक शहर के अधिकांश इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप रही। लेकिन इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह रही कि नेहरू नगर स्थित बिजली कार्यालय का फोन ही बंद रहा। धीरे-धीरे अधिकारियों के नंबर भी बंद होते चले गए, जिससे आम जनता पूरी तरह असहाय हो गई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले से ही बिजली विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है, और जो मौजूद हैं, वे आपात स्थिति में भी नदारद रहे। तकनीकी टीमों की अनुपलब्धता और जवाबदेही के अभाव ने हालात और भी बदतर बना दिए।
शहर के कई इलाकों में न तो ट्रांसफार्मर की जांच की गई, न ही लाइन मरम्मत के लिए कोई टीम भेजी गई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिलासपुर बिजली विभाग किसी आपदा के लिए तैयार है?
यह सिर्फ एक बारिश नहीं थी, यह था सिस्टम का फेल्योर—जहां जनता अंधेरे में थी और जिम्मेदार ‘सिस्टम’ चुप्पी साधे बैठा रहा।




