बिलासपुर

लोकस्वर की खबर का असर : बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैंटीन के नाम पर हुआ बड़ा खेल,जांच के लिए जेल विभाग से पहुंचे थे डिप्टी डायरेक्टर, दस्तावेज गायब

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर केंद्रीय जेल में कैंटीन के नाम पर तत्कालीन जेल अधीक्षक व जेलर ने खूब कमाई की, लोकस्वर ने मामले का खुलासा किया, जिसकी जांच शुरू हो गई है, जांच को गोपनीय रखा गया है. गृह विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जीपी बघेल जांच के लिए बिलासपुर केंद्रीय जेल पहुंचे थे,जिन्होंने दस्तावेजों की मांग की तो केंद्रीय प्रशासन ने अपने हाथ खड़े कर दिए.

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वर्ष 2016 में तत्कालीन जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा और जेलर अजय कुमार वाजपेयी ने विभाग से बिना अनुमति लिए जेल कर्मचारी कल्याण बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित का गठन किया, और समिति को अपने नाम पर पंजीयन कराकर जेल प्रांगण में कैंटीन की शुरुवात की, इसमें जेल अधीक्षक से एसएस तिग्गा, जेलर अजय कुमार बाजपेई सहित 22 जेल कर्मचारियों को शामिल किया गया.

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बिना अनुमति संचालित कैंटीन से रोजाना जेल के भीतर कैदियों के परिजन सामान खरीद कर भेजते थे. रोजाना यहाँ 60 से 70 हजार रुपए की बिक्री होती थी. बिक्री के बाद जो लाभांश की राशि आती थी उसको समिति के सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे.

कर्मचारी कल्याण के नाम पर तत्कालीन जेल अधीक्षक और जेलर ने खूब मनमानी की, इस मामले का खुलासा लोकस्वर न्यूज़ के द्वारा किए जाने के बाद, मामले में जेल विभाग ने जांच बैठा दी है. जेल विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वित्त जीपी बघेल जांच करने के केंद्रीय जेल बिलासपुर पहुंचे थे, उन्होंने जब वर्तमान जेल अधीक्षक खोमेश मांडवी से बहुउद्देशीय जेल कर्मचारी कल्याण सहकारी समिति के दस्तावेज मांगे तो, उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिये.

खोमेश मंडावी (जेल अधीक्षक)

दरअसल तत्कालीन जेल अधीक्षक एस एस तिग्गा और जेलर ने समिति को अपने नाम से पंजीयन कराया,जिसके कारण कोई दूसरा अधिकारी उस समिति का संचालन नहीं कर सकता.वर्ष 2023 मे तत्कालीन जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा और जेलर अजय कुमार बाजपेई का स्थानांतरण होने के बाद, दोनों अधिकारियों ने समिति के दस्तावेज गायब कर दिए, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि बिलासपुर केंद्रीय जेल में बहुउद्देशीय जेल कर्मचारी कल्याण सहकारी समिति के दस्तावेज मौजूद नहीं है.

वर्तमान जेल अधीक्षक का कहना है कि दोनों अधिकारियों के स्थानांतरण होने के बाद उन्होंने दस्तावेज जेल में जमा ही नहीं किया. जिसके कारण उन्होंने अवैध रूप से संचालित कैंटीन को बंद कर दिया.

अब सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ ठीक-ठाक था तो तत्कालीन समिति के पदाधिकारियों ने जेल में विधिवत दस्तावेजों को जमा क्यों नहीं किया. वर्ष 2016 में शुरू की गई कैंटीन से अब तक 4 करोड़ 54 लाख 18 हजार 9 सौ 59 रुपए की खरीदी बिक्री हुई है, जो की सूचना के अधिकार में आय पत्रक के रूप में दस्तावेज प्राप्त हुए हैं.

 

कैंटीन संचालित करने तत्कालीन अधीक्षक और जेलर ने अपने नाम कराया पंजीयन:- कैंटीन संचालक में खेल करने की योजना पहले ही तय कर ली गई थी, यही वजह रही थी बहुउद्देशीय जेल कर्मचारी कल्याण सहकारी समिति का पंजीयन अधिकारियों ने अपने नाम से कराया, जिस कारण कोई दूसरा अधिकारी उस समिति का संचालन नहीं कर सकता.तत्कालीन जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा और जेलर अजय कुमार बाजपेई का जब ट्रांसफर हुआ, तो कैंटीन संचालक को लेकर काफी दिक्कतें आई. वर्तमान जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने जब जानकारी ली, तुम्हें पता चला की जेल के आड़ में बड़ा खेल चल रहा था, उन्होंने तत्काल जेल के कैंटीन में ताला लगवा दिया.

तत्कालीन जेलर अजय कुमार बाजपेई

कैंटीन के दस्तावेज गायब:- बहुउद्देशीय जेल कर्मचारी कल्याण सहकारी समिति के दस्तावेज जेल से गायब है ऐसा हम नहीं कह रहे हैं. जेल से मिले सूचना के अधिकार मे यह जानकारी हमें प्रदान की गई है. तत्कालीन जेलर अजय कुमार बाजपेई का कहना है कि सभी दस्तावेज बिलासपुर केंद्रीय जेल में है, वहीं वर्तमान जेलर कोकिला वर्मा का कहना है कि जेलर अजय कुमार बाजपेई के ट्रांसफर होने के बाद दस्तावेज जेल के भीतर जमा ही नहीं किए गए.

तत्कालीन जेल अधीक्षक एस एस तिग्गा

लोकस्वर की खबर के बाद जांच के लिए पहुंचे डिप्टी डायरेक्टर वित्त:- मामले का खुलासा लोकस्वर के द्वारा किए जाने के बाद जेल विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वित्त की जीपी बघेल बिलासपुर केंद्रीय जेल पहुंचे थे, जहां उन्हें वर्तमान जिला अधीक्षक में दस्तावेज नहीं होने की बात कही, मामले में जांच के लिए दूसरी तिथि तय की गई है, वहीं वर्तमान अधिकारियों को मामले में जवाब के लिए तलब किया गया है. सूचना के अधिकार के दस्तावेज पंजीयन कार्यालय से प्राप्त हुए हैं. जेल से RTI के तहत जानकारी मांगने पर अधिकारियों ने पहले तो घुमा फिरा कर जवाब दिया. बाद में समिति के पदाधिकारीयो से पत्राचार कर दस्तावेज मांगे गए, लेकिन तत्कालीन जेलर अजय कुमार बाजपेई ने घुमा फिरा कर जवाब दिया लेकिन दस्तावेज प्रदान नहीं किया.

2016 से 2023 तक 4 करोड़ 41 लाख 8 हजार 9 सौ 59 रूपये की हुई खरीदी बिक्री :- समिति का जब पंजीयन हुआ सभी सदस्यों ने कैंटीन संचालक के लिए 10 से ₹20 हजार खर्च किए. वहीं कई सदस्यों ने अपने स्वेक्षा के अनुसार रुपये कैंटीन संचालक के लिए दिए. जो की 2016 से लेकर वर्ष 2023 तक 4 करोड़ 41 लाख 8 हजार 9 सौ 59 रूपये खरीदी बिक्री में खर्च किए जिसका आय व्यय सूचना के अधिकार में प्राप्त हुआ है.

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