छत्तीसगढ़

हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ के किसानों का परंपरागत त्यौहार- रामशरण यादव

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(शशि कोन्हेर) : बिलासपुर:- छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार हरेली तिहार के पूर्व संध्या पर बिलासा कला मंच द्वारा पारंपरिक खेलों और गीत संगीत के साथ पंडित देवकीनंदन कन्या उ मा विद्यालय परिसर में बड़े ही धूमधाम से मनाई गई।
हरेली तिहार उत्सव में खेल के रूप में महिलाओं के लिए रस्सी कूद,पिठ्ठूल, कुर्सी दौड़ रखा गया था तो वहीं पुरूष वर्ग के लिए नारियल फेंक,गेंड़ी दौड़ और गिल्ली डंडा जैसे खेल का आयोजन किया गया था। वही सामूहिक रूप से दोनो वर्ग के लिए रस्सा खींचने का कार्यक्रम भी आयोजित हुई।

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समारोह के मुख्य अतिथि महापौर श्री रामशरण यादव रहे, अध्यक्षता प्रसिद्ध नेत्ररोग विशेषज्ञ,समाजसेवी डा ललित मखीजा ने की, विशिष्ट अतिथि के रूप में समाज सेवी श्री चंद्रप्रकाश देवरस, वरिष्ठ साहित्यकार डा अजय पाठक,संयुक्त संचालक खनिज श्री जे आर चौहान, प्राचार्य श्री सचिन शर्मा और अध्यक्ष महेश श्रीवास उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर श्री रामशरण यादव ने कहा कि हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ के किसानों का परंपरागत त्यौहार है जिसमें कृषि औजारों की पूजा की जाती है। गावों में लोग साधनविहीन होते हुए भी त्यौहार को बहुत ही मजे से मनाते हैं,यही छत्तीसगढ़ की पहचान है।उन्होंने बिलासा कला मंच को बधाई देते हुए कहा कि एक मंच ही है जो 34 वर्ष से लगातार अपनी संस्कृति को मंच देने का बीड़ा उठाया हुआ है।अध्यक्षता करते हुए डॉ ललित माखीजा ने कहा कि मुझे इस हरेली तिहार उत्सव में आकर बहुत अच्छा लगा, बिलासा कला मंच छत्तीसगढ़ की संस्कृति और तीज त्योहार को संजो के रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। डा मखीजा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान ही अपनी लोक संकृति से है।

हरेली त्यौहार छत्तीसगढ़ के किसानों का परंपरागत त्यौहार- रामशरण यादव


विशिष्ट अतिथि श्री चंद्रप्रकाश देवरस ने कहा कि अब के बच्चे अपने पुराने खेल को भूलते जा रहे हैं उन्हें अच्छा लगा कि उनके नाती नातिन भी हरेली तिहार में शामिल हुए और गेड़ी चढ़े, गिल्ली डंडा खेले। डॉ अजय पाठक ने कहा कि हरेली तिहार अपने मूल स्वरूप में भारत के सिर्फ दो राज्य छत्तीसगढ़ और असम में मनाया जाता है जहाँ किसान भाई प्रकृति से जुड़े रहते हैं। बिलासा कला मंच का अपनी संस्कृति, तीज त्यौहार से जुड़ाव प्रसंशनीय है। हरेली तिहार का संचालन करते हुए मंच के संस्थापक डॉ सोमनाथ यादव ने बताया कि मंच का उदय 1988 में हुआ तब से बिलासा कला मंच पूरे वर्ष भर विविध  आयोजन करते आ रही है।  

             
                इस अवसर पर समाज में विभिन्न माध्यमों से निरंतर सेवाकार्य में लगे रहने वाले पशु चिकित्सक डा बी पी सोनी और समाजसेवी श्री शंकर यादव का बिलासा सेवा सम्मान देकर श्रीफल,शाल, स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया ।कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन संयोजक रामेश्वर गुप्ता ने किया।


           उत्सव में आयोजित प्रतियोगिता में रस्सी कूद में प्रथम श्रीमती मंजू यादव, द्वितीय श्रीमती स्वाती निर्रेजक,तृतीय श्रीमती बसंती वर्मा रही,कुर्सी दौड़ में श्रीमती शोभा बिबे प्रथम,श्रीमती कमलेश पाठक द्वितीय, श्रीमती अनुराधा मुखर्जी तृतीय रही,पिठ्ठूल प्रतियोगिता में कुमारी गीतांजलि मानिकपुरी प्रथम,श्रीमती अनुराधा मुखर्जी द्वितीय, श्रीमती पुष्पा श्रीवास तृतीय रही वही गेंड़ी दौड़ में प्रदीप निर्रेजक प्रथम,महेश श्रीवास द्वितीय, प्रदीप कोशले तृतीय रहे,नारियल फेंक में बिनु सिंग प्रथम, उमेंद् यादव द्वितीय, नीलकमल तृतीय रहे, गिल्ली डंडा में बिनु सिंग प्रथम, नीलकमल द्वितीय, प्रदीप निर्रेजाक तृतीय स्थान पर रहे। महिलाओं और पुरुषों के बीच रस्सा खींच प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।समारोह में मंच के कलाकारों द्वारा छत्तीसगढ़ी और हिंदी गीतों से कार्यक्रम गरिमा बढा़ दी।
           समारोह में  सर्वश्री डॉ सुधाकर बिबे,राघवेंद्रधर दीवान,डॉ देवधर महंत,डॉ जी डी पटेल, महेश भार्गव, केवलकृष्ण पाठक,डॉ विनोद वर्मा,सचिन शर्मा, डॉ सोमनाथ मुखर्जी, विश्वनाथ राव,आनंद प्रकाश गुप्त,अश्विनी पांडे,अनूप श्रीवास, अनिरुद्ध क्षत्री,नरेन्द्र कौशिक,सुनील तिवारी, ओमशंकर लिबर्टी, मनीष गुप्ता, विनोद गुप्ता, महेन्द्र गुप्ता, देवानंद दुबे,मनोहरदास मानिकपुरी,श्रीमती रश्मि गुप्ता,यशवंत साहू,शरद यादव,थानुराम लसहे,शैलेष कुम्भकार, नंदकुमार यादव, भरत मस्तुरिया,गोपाल यादव,चंदशेखर बघेल  सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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