पूर्व सीएम भूपेश बघेल का तीखा हमला : कहा, शालाएं बंद, मधुशालाएं चालू; सरकार किसान, आदिवासी और शिक्षा विरोधी

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर पहुंचे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि धान खरीदी से लेकर रोजगार और शिक्षा तक हर मोर्चे पर यह सरकार विफल साबित हो रही है। उन्होंने इसे किसान और आदिवासी विरोधी सरकार बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार निजी प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे, जहां उन्होंने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों को हतोत्साहित करने की साजिश रच रही है, ताकि उन्हें धान न खरीदना पड़े। बघेल ने बताया कि धान की नीलामी में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 600 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। DAP खाद और बीज की अनुपलब्धता, पिछले साल के धान का अब तक न उठाया जाना ये सब किसान विरोधी रवैए के स्पष्ट संकेत हैं। भूपेश बघेल ने बिजली कटौती को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि “बिजली कटौती सांय-सांय हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों के पास रोजगार नहीं है, जिससे वे पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। बघेल के मुताबिक, बस्तर से 30-40 हजार युवक-युवतियों को दूसरे प्रदेशों में जाना पड़ा है, और वहां एक दहशत का माहौल है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को आदिवासी विरोधी बताते हुए कहा कि आदिवासी युवक-युवतियों को झूठे मामलों में जेल में डाला जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि 6 महीने के बच्चे को नक्सली बताकर मार दिया गया, कई निर्दोषों को नक्सली करार देकर मारा गया, जबकि उनके शासनकाल में एक क्रॉस फायरिंग हुई, उसे भी हमने स्वीकार किया, ऐसा उन्होंने कहा। 16 जून से राज्य में शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है लेकिन भूपेश बघेल का कहना है कि पूरे शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। हजारों स्कूल बंद किए जा रहे हैं,शिक्षकों की कमी बढ़ रही है, इसका असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ेगा। उन्होंने कटाक्ष किया कि सरकार शालाएं बंद कर रही है, मधुशालाएं खोल रही है। इससे बच्चों को दूरदराज स्कूलों तक जाना पड़ेगा, जिससे ड्रॉपआउट दर बढ़ेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की महतारी वंदन योजना पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भुगतान नहीं हो रहा और 70 हजार महिलाओं के नाम योजना से हटा दिए गए हैं। इसे उन्होंने सरकार की विफलता और असंवेदनशीलता का प्रमाण बताया। पूर्व मुख्यमंत्री के इन आरोपों पर अब तक सरकार की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। देखना होगा कि राज्य सरकार इन आरोपों का जवाब कैसे देती है।




