यहाँ जन्मा छत्तीसगढ़ का पहला ‘मरमेड बेबी’, 3 घंटे जीवित रहने के बाद हुई मौत

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अस्पताल में 1 अक्टूबर को एक ऐसा बच्चा जन्मा, जिसने डॉक्टरों और नर्सों को भी हैरान कर दिया। इस नवजात का मामला न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के लिए भी बेहद दुर्लभ है। 483 साल के मेडिकल इतिहास में यह दुनिया का 300वां, भारत का दूसरा और छत्तीसगढ़ का पहला केस है। जन्म के करीब 3 घंटे बाद इस नवजात की मौत हो गई। डॉक्टरों ने इसे “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट” केस बताया है।
धमतरी की 28 साल की महिला ने जिस शिशु को जन्म दिया, उसके दोनों पैर जलपरी की तरह जुड़े हुए थे। बच्चे का वजन मात्र 800 ग्राम था। ऊपरी शरीर पूरी तरह सामान्य था – आंख, नाक और हार्ट विकसित थे, लेकिन रीढ़ की हड्डी से नीचे का हिस्सा जुड़ा हुआ था। इस वजह से उसे मरमेड सिंड्रोम या सिरेनोमेलिया कहा जाता है। जन्म के बाद उसे लाइफ सपोर्ट पर रखा गया, लेकिन कुछ ही घंटों में उसने दम तोड़ दिया।
मरमेड सिंड्रोम एक बेहद दुर्लभ जन्मजात विकृति है, जिसमें पैरों का जुड़ाव जलपरी की पूंछ जैसा दिखता है। दुनिया में 1542 से अब तक केवल 300 मामले ही दर्ज हुए हैं। भारत में इससे पहले 2016 में उत्तर प्रदेश में पहला ऐसा केस सामने आया था, जहां बच्चा जन्म के 10 मिनट बाद ही मौत के मुंह में चला गया था। धमतरी का यह केस भारत का दूसरा और छत्तीसगढ़ का पहला मामला है।

डिलवरी कराने वाली गायनी विशेषज्ञ डॉ. रागिनी सिंह ठाकुर ने बताया कि उनके 9 साल के करियर में यह दूसरा मरमेड सिंड्रोम का केस है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सोनोग्राफी में इसका पता चल जाता है, लेकिन इस केस में डिलवरी के बाद ही असामान्यता सामने आई। डॉक्टरों का मानना है कि पोषण की कमी, गर्भावस्था के दौरान दवाओं का असर, भ्रूण को रक्त संचार में गड़बड़ी या मां को मधुमेह होने पर इस तरह का रिस्क बढ़ सकता है।
धमतरी का यह दुर्लभ मामला न सिर्फ प्रदेश बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे केस “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट” होते हैं और नवजात के जीवित रहने की संभावना बेहद कम रहती है।




