कोरोना महामारी पर भारी, सीएमपीडीआई की अफसरी

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बिलासपुर। केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न दिशा निर्देशों एवं गाइड लाइन के बावजूद भी कोरोना महामारी के अवस्था में जबकि पूरा राज्य पूरा देश लाक डाउन की स्थिति में है, वहां सीएमपीडीआई के कुछ अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण उस कार्यालय में अधिकारी एवं कर्मचारियों की जान सांसत में है। इन अधिकारियों द्वारा एसेंशियल सर्विस एवं पब्लिक यूटिलिटी सर्विस अधिनियम के नाम पर अधीनस्थ कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भय दिखाकर कार्यालय बुलाने की कोशिश की जा रही है एवं कार्यालय बुलाने पर प्रधानमंत्री के आह्वान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं किया जा रहा है। लगातार मीटिंग दर मीटिंग ली जा रही है। जबकि यह सारे कार्य घर में ही बैठे किया जा सकता है। लेकिन कुछ अधिकारियों के ईगो सेटिस्फेक्शन एवं अपने सीआर के कारण लगातार कर्मचारियों में दबाव बनाया जा रहा है और कहां जा रहा है SECL की तर्ज पर पास लिया जाए | SECL एक कोल उत्पादन कंपनी है एवं सीधे रूप से उत्पादन से जुड़ा हुआ है| वहीं सीएमपीडीआई एक कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी है। लेकिन इसका प्रभाव केवल प्लानिंग के रूप में ही सहयोग करने में है। इनका मुख्य कार्य ड्रिलिंग कर कर कोयले की क्वालिटी पता करना है जो कि लाॅक डाउन के कारण बंद है। मुख्य कार्य के बंद होने के बावजूद भी मार्च की अंतिम तिथि का हवाला देते हुए लोगों को ऑफिस बुलाकर जबरन ही तंग किया जा रहा है। अधिकारी एवं यूनियन के पदाधिकारियों ने इस मामले को उच्च स्तर पर गंभीरता से उठाने की बात कही है। अगर वह या उनका परिवार कोई कोरोना से ग्रसित हो जाता है तो इसका समस्त जिम्मेदारी सीएमपीडीआई प्रशासन की होगी।

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