स्मार्ट कार्ड से जिनका पहले हुआ इलाज आयुष्मान में उनका डाटा ही गायब हुआ

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मोहन सिंह ठाकुर
बिलासपुर। आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत बने स्मार्ट कार्ड से लोगों का इलाज निजी अस्पतालों ने बंद कर दिया है। इधर हितग्राही जब स्मार्ट कार्ड को आयुष्मान कार्ड में बदलवाने कियोस्क सेंटर पहुंचते हैं तो कार्ड में हितग्राहियों के परिवार की जगह किसी दूसरे परिवार का नाम दिखाता है। लिहाजा उन्हें वापस भेज दिया जा रहा है। कार्ड न होने से गरीब हितग्राहियों को जमीन-घर गिरवी रख कर इलाज कराना पड़ रहा है। बीमा कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत वर्ष -2018 में बने स्मार्टकार्डधारियों का सरकारी बेवसाइट पर डाटा ही अभी अपलोड नहीं किया गया है। विभाग की लापरवाही के चलते अब न तो हितग्राहियों को स्मार्ट कार्ड का लाभ मिल पा रहा है और न ही आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल पा रहा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष प्रदेशभर में 50लाख से अधिक परिवारों का स्मार्ट कार्ड बनाया गया था, वहीं सितंबर 2018 में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की जगह आयुष्मान भारत योजन लागू कर दिया गया, जिसके अंतर्गत इलाज राशि को 50 हजार से बढ़ा कर 5 लाख कर दिया गया। पर जब हितग्राही पुराना स्मार्ट कार्ड लेकर इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं तो उन्हें बताया जाता है कि स्मार्ट कार्ड बंद हो चुका है। इसके बदले अब आयुष्मान कार्ड बनवाना पड़ेगा। इधर जब आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए आयुष्मान मित्र के पास हितग्राही पहुंच रहे तो वहां उन्हें पता चलता है कि जो कार्ड वो रखे हैं उसमें उनके परिवार का नाम ही नहीं है। जब तक परिवार का नाम ऑनलाइन नहीं होगा तब तक नया कार्ड नहीं बन सकता। इस तरह लाखों हितग्राही विभागीय गलती का खामियाजा भुगतने मजबूर हैं। स्मार्ट कार्ड होने के बाद भी पैसा देकर इलाज कराना पड़ रहा है।

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