श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया गुरुनानक देव जी का प्रकाश पर्व, गूंजे गुरु बाणी के मधुर स्वर, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया लंगर प्रसाद

(राम प्रसाद गुप्ता) : एमसीबी। जिले के मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में सिख गुरु श्री गुरुनानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के सभी गुरुद्वारों में सुंदर सजावट की गई थी। रंग-बिरंगी लाइटें, फूलों की झालरें और धार्मिक झंडों से पूरा परिसर भक्ति रंग में रंगा नजर आया।
सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता गुरुद्वारों में लग गया था। संगत ने श्रद्धा भाव से मत्था टेका, अरदास की और गुरु बाणी का पाठ किया। जगह-जगह आयोजित कीर्तन दरबारों में रागी जत्थों ने “सतनाम वाहेगुरु” के स्वर से वातावरण को पवित्र कर दिया। गली-मोहल्लों में गुरु नानक देव जी के उपदेशों की गूंज सुनाई देती रही। प्रकाश पर्व के अवसर पर शहर के प्रमुख मार्गों से होकर भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। शोभायात्रा में सिख समाज के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। नगर कीर्तन के दौरान “गुरु नानक देव जी अमर रहें” और “सतनाम वाहेगुरु” के जयघोष से पूरा मनेन्द्रगढ़ गूंज उठा।
मुख्य बाजार स्थित गुरुद्वारा सहित सभी गुरुद्वारों में अटूट लंगर का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी श्रद्धालु सेवा भावना से लंगर में सहयोग करते नजर आए। महिलाएं रसोई सेवा में लगीं तो युवाओं ने भोजन वितरण की जिम्मेदारी संभाली।
एक श्रद्धालु ने बताया की गुरु नानक देव जी ने हमें सिखाया कि सच्चाई, ईमानदारी और समानता के मार्ग पर चलना ही असली धर्म है। उन्होंने कहा कि सेवा ही सच्ची भक्ति है और आज इस पर्व में हर कोई उसी भावना के साथ जुड़ा हुआ है।
इस अवसर पर धार्मिक प्रवचनों में वक्ताओं ने गुरु नानक देव जी के जीवन और उनके उपदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी ने मनुष्य को जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकता, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। गुरु जी के उपदेश “एक ओंकार सतनाम” का अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर एक है और हम सभी उसी के अंश हैं। इस विचार को आत्मसात करना ही गुरु नानक देव जी की सच्ची अरदास है।




