
(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर शहर के मंगला वार्ड 13 में प्रशासन की आंखों के सामने खुलेआम अवैध रेत खनन हो रहा है। बंद घोषित किए गए घाटों पर सुबह से रात तक ट्रैक्टरों की आवाजाही जारी है। हैरानी की बात ये है कि प्रशासन को लगातार शिकायतें मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मंगला वार्ड 13 का ये नजारा अब आम हो गया है। सुबह, दोपहर, शाम हर वक्त ट्रैक्टरों की कतारें उन रेत घाटों की ओर जाती नजर आती हैं, जिन्हें प्रशासन पहले ही बंद घोषित कर चुका है। इन घाटों पर किसी भी तरह की रेत खनन की अनुमति नहीं है, लेकिन फिर भी यहाँ से चौबीसों घंटे रेत की अंधाधुंध ढुलाई हो रही है।
ये पूरा इलाका अब रेत माफियाओं के नियंत्रण में है। वार्ड पार्षद ने कलेक्टर से शिकायत की है, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंगला के आदर्श चौक से धुरीपारा तक पूरा रिहायशी इलाका रेत माफिया की गिरफ्त में है। खनिज अधिकारी रमाकांत सोनी कहते है जहां अवैध खनन होता है, वहीं कार्रवाई की जाती है।
26 तारीख को टास्क फोर्स बनाई गई थी, जिसमें राजस्व, पुलिस, परिवहन विभाग शामिल हैं। हम लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं और जैसे ही शिकायत मिलती है, मौके पर जाकर कार्रवाई की जाती है।
खनिज अधिकारी का दावा है कि अवैध खनन की सूचना मिलते ही कार्रवाई की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आती है। न तो ट्रैक्टर जब्त हुए, न ही माफिया के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई दिखी है।
प्रशासनिक कार्रवाई की ये गति अगर बनी रही, तो मंगला जैसे और भी रिहायशी इलाके जल्द ही रेत माफियाओं के अड्डे बन सकते हैं। सवाल ये है बंद घोषित घाटों से खुलेआम रेत ढुलाई आखिर कैसे हो रही है? और किसके संरक्षण में हो रही है, यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है.




