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छत्तीसगढ़

रायपुर शहर से 54 तालाब गायब, सरोवरों का नगर था रायपुर

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रायपुर : हर साल विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। हम जानते हैं कि पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी है। 1.6 प्रतिशत पानी जमीन के नीचे पाया जाता है। पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले पानी का 97 प्रतिशत जल सागरों और महासागरों में है, जो पीने के योग्य नहीं होता, केवल 3 प्रतिशत पानी ही पीने लायक है। बढ़ती जनसंख्या के लिए पानी की उपलब्धता के लिए दुनियाभर में चिंता छाई हुई है। प्रयास भले ही किए जा रहे हैं पर कहा यह भी जा रहा है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिए ही होगा। इस वर्ष के जल दिवस की थीम अक्सेलरेटिंग चेंज है। 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित पर्यावरण और विकास सम्मेलन में विश्व जल दिवस मानए जाने की पहल हुई थी।

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1993 में पहली बार विश्व जल दिवस मनाया गया था।
सरोवरों के नगर के नाम से प्रसिद्ध रहा मेरा रायपुर इन दिनों जल संकट से दो-चार हो रहा है। जनता के टैक्स से वसूली गई राशि हर साल जल प्रदाय के लिए टैंकरों पर फूंकी जा रही है। टैंकरों से बहते पानी को ही बचा लिया जाए तो हम पर बड़ा उपकार होगा। पिछले दो-तीन माह के दौरान ‘हर घर नल’ के लिए पाइप बिछाई गई, कई इलाकों में अभी भी यह प्रक्रिया जारी है। शहर धूल से अटा पड़ा है। मुख्य पाइप से घरों तक ‘शुद्ध जल’ पहुंचाने के लिए पाइप लगा कर छोड़ दिया गया है। नल से उसे जोडऩे का काम कम से कम मेरे मुहल्ले में तो शुरु नहीं हुआ है, जिसका परिणाम है रोज हजारों लीटर पानी या तो नालियों में बह रहा है या सड़कों पर। जल संरक्षण और भूगर्भीय जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए तालाब सबसे अधिक कारगर माने गए हैं। इसे हमारे ‘अनपढ़-अशिक्षित’ पूर्वज जानते थे।
रायपुर के सरोवरों का निर्माण वैज्ञानिक पध्दति से हुआ है। बूढ़ा तालाब व बंधवा के ओवर फ्लो का खरून नदी में मिलना उस तकनीक का नमूना है। वैध-अवैध बेतरतीब निर्माणों ने तालाबों के अंतर्संबंधों, नहरों और जल आवक रास्तों को बाधित कर दिया, बूढ़ा तालाब पहले इस तरह अन्य तालाबों से जुड़ा था कि इसमें पानी लबालब होते ही महाराजबंध तालाब में पानी जाने लगता था और उसके आगे अन्य किसी में। शहर के इतिहास की जानकारी रखने वाले जानते हैं कि रजबंधा तालाब का फैलाव 7.975 हेक्टेयर था, आज वहां चौरस मैदान है। रजबंधा की छाती का पानी सूख गया, उसके सीने पर लोहे की छड़े गाड़ दी गईं, सीमेंट-ईंट के जंगल खड़े कर दिए गए। 6 हेक्टेयर से ज्यादा बड़े सरजूबंधा को पुलिस लाइन लील गया और डेढ़ हेक्टेयर से भी विशाल खंतो तालाब पर शक्तिनगर बस गया। पचारी, नया तालाब और गोगांव ताल को उद्योग विभाग के हवाले कर दिया गया तो ढाबा तालाब (कोटा) और डबरी तालाब (खम्हारडीह) पर कब्जे हो गए। क्या आप मानेंगे कि सन् 1929-30 के राजस्व रिकार्ड में इसका रकबा 35 एकड़ था?
साल 2018 में सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रदीप यदु ने रायपुर शहर के तालाबों के गायब होने के मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिसमें बताया गया था कि रायपुर शहर के अंदर से 54 तालाब गायब हो गए हैं। इस संबंध में वन एवं अनुसंधान संस्था ने शहर के तालाबों की स्थिति पर सर्वे कर अपनी रिपोर्ट भी दी। संस्था की रिपोर्ट में ही 54 तालाबों के गायब होने का विवरण दर्ज है।
1. सरजू बांधा तालाब, मठपुरैना-1.174 पट चुका
2. जोगी डबरी, मठपुरैना-0.182 सूख गया
3. कालारीन तालाब, रायपुरा-0.121 सूख गया
4. कोटा डबरी, रायपुरा-पट चुका
5. छोटे कोट डबरी, रायपुरा-सूख गया
6. नया तालाब, अटारी-सूख गया
7. भुकुडिया तालाब, जरवाय हीरापुर 0.571 हेक्टेयर-सूख गया
8. दर्री तालाब, गोगांव-0.870 हेक्टेयर-सूख गया
9. बिच्छी तालाब, गोगांव, 0.502 हेक्टेयर-सूख गया
10. कोठारी तालाब, सड्डू-0.320 हेक्टेयर-सूख गया
11. डबरी तालाब, लाभांडी-0.721 हेक्टेयर-सूख गया
12. निस्तारी तालाब, लाभांडी-1.424 हेक्टेयर-सूख गया
13. डबरी तालाब अमलीडीह-2.773 हेक्टेयर-सूख गया
14. रामबांधा, फुंडहर-0.918 हेक्टेयर-सूख गया
15. करबला तालाब, चौबे कॉलोनी तालाब, चिरहुलडीह-2.222 हेक्टेयर पट गया
16. नूनहा तालाब, चिरहुलडीह-0.882 हेक्टेयर-पट गया
17. ढाबा तालाब, कोटा-0.445 हेक्टेयर-पट गया
18. पैठू तालाब, पंडरी तराई-2.387 हेक्टेयर-पट गया
19. ढोडगी तालाब, पंडरी तराई-0.154 हेक्टेयर-पट गया
20. मठैया तालाब, शंकर नगर-0.599 हेक्टेयर-पट गया

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21. डबरी तालाब, शंकर नगर-0.299 हेक्टेयर पट चुका है
22. नया तालाब, शंकर नगर-1.214 हेक्टेयर दलदल में तब्दील
23. सगर बुद्धिया तालाब, शंकर नगर-0.490 हेक्टेयर मकान बन गए
24. पचपेढ़ी तालाब, टिकरापारा-1.275 हेक्टेयर दलदल
25. छुईया डबरी, टिकरापारा-0.870 हेक्टेयर दलदल
26. नाउन डबरी, टिकरापारा-1.761 हेक्टेयर-पट गया
27. कारी तालाब, रायपुरा खास-3.141 हेक्टेयर दलदल
28. गंज डबरी, रायपुर खास, 0.708 हेक्टेयर-पट गया
29. हांडी लाताब, जोरापारा, 3.157 हेक्टेयर-पट गया
30. राम सगरी तालाब, रामसागर पारा-1.433 हेक्टेयर-पट गया
31. रजबंधा से लगा डबरी-2.408 हेक्टेयर-पट गया
32. रजबंधा तालाब, रायपुर-7.975 हेक्टेयर-पट चुका
33. लेंडी तालाब, (इसके सीने पर शास्त्री बाजार खड़ा है)-1.696 हेक्टेयर-पट चुका
34. श्याम टाकीज डबरी, 0.242 हेक्टेयर-स्टेडियम बन गया
35. तुर्की तालाब, ईदगाह भाटा-0.611 हेक्टेयर दलदल
36. दर्री तालाब-1.396 हेक्टेयर-सूख गया
37. बंधवापारा पैठू-0.485 हेक्टेयर दलदल
38. खदान तालाब-1.777 हेक्टेयर दलदल
39. पहाड़ी तालाब, गुढिय़ारी-0.809 हेक्टेयर-पट गया
40. दंतेश्ववरी डबरी-1.327 हेक्टेयर-पट गया
41. गजराज बांधा डबरी-0.024 हेक्टेयर-पट गया
42. बूढ़ा तालाब पैठू-4.149 हेक्टेयर-पट गया
43. हनुमान नगर तालाब (आमापारा)-3.497 हेक्टेयर-पट गया
44. खनती तालाब-1.684 हेक्टेयर-पट गया
45. जोरा तालाब, जोरा पार-1.716 हेक्टेयर-पट गया
46. छुइया तालाब, पुरानी बस्ती-1.101 हेक्टेयर-पट गया
47. बगीचा तालाब-0.765 हेक्टेयर-पट गया
48. उच्छला तालाब-1.242 हेक्टेयर-पट गया
49. धोबनीन तालाब-1.882 हेक्टेयर पट गया
50. पोतदार तालाब-1.202 हेक्टेयर-पट गया
51. ट्रस्ट तालाब, शंकर नगर-0.793 हेक्टेयर पर रविशंकर गार्डन
52. पचरी तालाब, गोगांव, उद्योग विभाग को
53. नया तालाब, गोगांव, 0.012 हेक्टेयर उद्योग विभाग को
54. तालाब, गोगांव, 0.794 हेक्टेयर उद्योग विभाग को
रायपुर में लगभग 200 तालाब थे-तेलीबांधा से आमानाका तक। इनमें से बहुत से तालाबों का नाम तो मैंने भी नहीं सुना था, देखने की बात तो दूर है। विकास के नाम पर जिस तरह से रायपुर के तालाबों का कत्लेआम हुआ है वैसा अन्यत्र कहीं हुआ हो मैंने तो नहीं सुना है। जागो रायपुर वालों, जो बचे-खुचे सरोवर इस शहर में हैं उनकी रक्षा करो।

आशीष सिंह CNIN से साभार

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